प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)

प्रोजेस्टेरोन (Progesterone)

प्रोजेस्टेरोन शरीर में आंतरिक रूप से बनने वाला एक स्टेरॉयड हॉर्मोन है और महिलाओं में मासिक चक्र व गर्भावस्था के नियमन और भ्रूण के विकास में सहायक होता है। प्रोजेस्टेरोन महिलाओं में युवावस्था की शुरुआत से लेकर मेनोपॉज के समय तक अंडाशय (ओवरी) में काफी मात्रा में निर्मित होता है। गर्भावस्था के दौरान, गर्भ को पूरी अवधि तक सुरक्षित रखने के लिए ओवरी तथा प्लेसेंटा (मां व भ्रूण के बीच पोषक तत्वों के आदान-प्रदान के लिए गर्भावस्था में बनने वाली विशिष्ट गर्भनाल) के द्वारा सतत बढ़ती मात्रा में प्रोजेस्टेरोन का निर्माण होता है। प्रोजेस्टेरोन गर्भावस्था में भ्रूण के विकास से संबंधित कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है व गर्भावस्था के दौरान इसका उच्च स्तर स्तनों में दूध उतरने नहीं देता। गर्भावस्था के अंतिम चरण में प्रोजेस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे घटता है जो प्रसव की शुरूआत में मदद करता है। प्रसव के बाद प्रोजेस्टेरोन के स्तर घटने से स्तनों में दूध बनने लगता है। प्रोजेस्टेरोन व प्रोलैक्टिन (स्तनपान के दौरान स्तनों में दूध उतरने में मदद करने वाला हॉर्मोन) मिलकर महिलाओं में स्तनों की ग्रंथियों के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

कमी

जिन महिलाओं में प्रोजेस्टेरोन का स्तर कम होता है, उनमें असमय प्रसव और गर्भपात की अधिक संभावना होती है।

उपचार

गर्भावस्था के दौरान अनचाहे रक्त साव की रोक-थाम के लिए प्रोजेस्टेरोन का उपयोग किया जाता है। जिन महिलाओं में गर्भाशय की अंदरूनी परत कमजोर होने से गर्भपात का जोखिम अधिक होता है, उन्हें गर्भावस्था को सुरक्षित रखने के लिए प्रोजेस्टेरोन के टीके लगाए जाते हैं। आंतरिक प्रोजेस्टेरोन की कमी से जिन महिलाओं को बार-बार गर्भपात हो जाता है, उन्हें अतिरिक्त प्रोजेस्टेरोन दिया जा सकता है। अनियमित मासिक चक्र की समस्या होने पर महिलाओं को माहवारी शुरू कराने के लिए प्रोजेस्टेरोन का मौखिक सेवन अनुशंसित है।

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